जल्दी -जल्दी घर के सारे काम निपटा, बेटे को स्कूल छोड़ते हुए ऑफिस जाने का सोच, घर से निकल ही रही थी कि... फिर पिताजी की आवाज़ आ गई, *"बहू, ज़रा मेरा चश्मा तो साफ़ कर दो ।"* और बहू झल्लाती हुई.... सॉल्वेंट ला, चश्मा साफ करने लगी। इसी चक्कर में बेटा स्कूल में और खुद आज फिर ऑफिस देर से पहुंची। गाहे बगाहे पिताजी की यूँ, घर से निकलते हुए, पीछे से आवाज देने की आदत, बहु को अच्छी नही लगती थी। पर जानती थी कि पलँग से न उठ पाने की बावजूद पिताजी पूरे दिन में उसे यही एक दो काम ही तो कहते थे। काम छोटा सा था पर आफिस जाने की भी तो जल्दी होती थी सुबह सुबह। एक दिन पति से चर्चा की। पति की सलाह पर अब वो सुबह उठते ही पिताजी का चश्मा साफ़ करके रख देती, लेकिन फिर भी घर से निकलते समय पिताजी का बहू को बुलाना बन्द नही हुआ। दिन बीते एक समय वो आया कि समय से खींचातानी के चलते अब बहू ने पिताजी की पुकार को अनसुना करना शुरू कर दिया । एक दिन ऑफिस की छुट्टी थी तो बहू ने सोचा, क्यों न घर की साफ- सफाई कर लूँ । अचानक, पलँग से नीचे गिरी पिताजी की डायरी हाथ लग गई। उसे पलँग पर उठाकर रखते हुए, उत्सुकता हुई, कि देखूं तो, ...
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